मडुवा/Madua
मडुवा/Madua

औषधीय वनस्पतियों के लिए मशहूर देश का उत्तराखंड राज्य पौष्टिक अनाजों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं अनाजों की श्रृंखला में आज बात करते हैं ‘मडुवा/मंडुवा’ (Finger millet) की। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की परंपरागत फसलों में एक प्रमुख स्थान रखने वाला अनाज है ‘मंडुवा’। मडुवे का वैज्ञानिक नाम ‘एलुसिन इंडिका’ है। इसे रागी व कोदा नामों से भी जाना जाता है। जो प्राकृतिक संतुलन बनाने में मददगार तो होता ही है, साथ ही गरीब कुनबों का संतुलित आहार भी होता है। प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व भरे रहने से मडुवा कई बीमारियों को मात देने में सक्षम होता है और ताकतवर शरीर बनाने में मददगार होता है।

इसमें है पोषक तत्वों का खजाना

उत्तराखंड के कुल कृषि क्षेत्र में से औसतन 85 प्रतिशत असिंचित हिस्से में इसकी खेती की जा सकती है/की जाती है। उत्तराखंड में 36 हजार हेक्टेअर में इसकी खेती होती है। मंडुवा की खासियत है कि यह स्वास्थ्य के लिए काफी बेहतर है। जिसकी वजह है इसकी खास पौष्टिकता। इसके आटे में प्रचुर मात्रा में रेशा होता है, यही वजह है कि इसका सेवन हृदय व मधुमेह रोगियों के लिए अति लाभदायी माना गया है। सिर्फ इतना ही नहीं मडुवे में मौजूद पर्याप्त पोषक तत्वों में इतनी क्षमता है कि यह कुपोषण से बचा सकने में बेहद मददगार होता है। मडुवा शुगर, खांसी, घेंघा व सांस रोगियों के लिए भी यह उपयोगी है। इसी महत्व को समझते हुए अब रोटी के अलावा मडुवे के बिस्कुट, हलुवा, नमकीन, केक आदि उत्पाद भी तैयार होकर बाजार में उतर रहे हैं। कुछ दशक पहले की तुलना में कहा जाए, तो मडुवे का उत्पादन कम हो रहा है। इसीलिए सरकार इसका रकबा बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत है।

मडुवा (Madua) : पौषक तत्वों से भरपूर है मडुवा, हृदय व मधुमेह रोगियों के लिए वरदान

बारानाजा परिवार का सदस्य है मडुवा

अनाजों का एक ‘बारानाजा परिवार’ होता है, उसी का एक प्रमुख सदस्य मडुवा है। यह एक बहु उपयोगी अन्न तो है ही।साथ ही यह पशुओं के चारा है, तो खेतों के लिए जैविक खाद व नाइट्रोजन देता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह बच्चों को दिया जाने वाला सेरेलक का विकल्प है। मडुवे का उत्पादन जैविक रूप से होने से अब विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ी है।

जानिए: अनाजों का बारानाजा परिवार

यहां अनाजों के बारानाजा परिवार को समझना भी जरूरी है। दरअसल, बारानाजा खेती की एक पद्धति है। जिसमें काश्तकार एक साथ 12 फसलों का उत्पादन कर अपनी आजीविका सुदृढ़ करने का प्रयास करते हैं। इन बारानाजा परिवार की फसलों में मडुवा, झंगोरा, ज्वार, चौलाई, भट्ट, तिल, राजमा, उड़द, गहत, नौरंगी, कुट्टू, लोबिया आदि शामिल हैं। जो सभी पोषक तत्वों से भरे हैं।

मडुवे में पोषक तत्वों की मात्रा

प्रति सौ ग्राम मडुवे में 2.7 ग्राम खनिज, 7.3 ग्राम प्रोटीन, 3.6 ग्राम रेशा, 72 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 344 मिलीग्रम कैल्शियम, 283 मिलीग्राम फास्फोरस व 13.1 ग्राम जल मौजूद रहता है।